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बिहार में कार्यरत पंचायत रोजगार सेवकों ने एक बार फिर अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पंचायत रोजगार सेवक कल्याण संघ – बिहार के बैनर तले राज्य भर के सेवकों ने 28 सितंबर 2028 को अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का ऐलान किया है। संघ ने इस संबंध में विभागीय मंत्री को प्रेस विज्ञप्ति और 11 सूत्री मांग पत्र सौंपा है।

संघ के प्रदेश प्रवक्ता मनीष आनंद ने बताया कि बिहार के पंचायत रोजगार सेवक पिछले 12 से 20 वर्षों से अल्प मानदेय पर पंचायतों में अपनी सेवा दे रहे हैं। सरकार द्वारा अन्य विभागों के संविदा कर्मियों को नियमित किया जा रहा है, लेकिन रोजगार सेवकों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है।

संघ की प्रमुख 11 सूत्री मांगें इस प्रकार हैं:

  1. नियमितीकरण की मांग: 12 से 20 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके सेवकों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश (SLP No. 5580 Of 2024 Jaggo Vs. Union of India और CIVIL APPEAL No. 8558 Of 2018) के आलोक में अन्य विभागों की तरह नियमित/स्थायी किया जाए।
  2. मानदेय में बढ़ोतरी: पटना हाईकोर्ट के CWJC No. 2638/2018 के आदेश के अनुरूप न्यूनतम मजदूरी लागू की जाए। संघ ने बताया कि वर्तमान में पंचायत सचिव को 36,000, रोजगार कर्मी को 31,726, विकास मित्र को 25,000, कार्यपालक सहायक को 27,000 मिल रहा है, जबकि पंचायत रोजगार सेवक को मात्र 17,878 रुपये मिल रहे हैं।
  3. गृह जिला स्थानांतरण: सभी सेवकों का ऐच्छिक गृह जिला स्थानांतरण किया जाए।
  4. अनुकंपा नियुक्ति: सेवाकाल के दौरान मृत पंचायत रोजगार सेवक के आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर नियोजन दिया जाए।
  5. बर्खास्तगी आदेश वापस हो: विभाग के पत्रांक-आरो-2(BRDS-16/2013/2003311) दिनांक 09.09.2014 को तुरंत रद्द कर बहाल किया जाए।

6 & 7. उत्पीड़न और एकतरफा कार्रवाई पर रोक: सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक-03 दिनांक 01.01.2026 के आलोक में ही शिकायतों की जांच हो और बिना पक्ष सुने किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगे।

  1. कैशलेस चिकित्सा: सभी सेवकों और उनके परिवार के लिए 10 लाख तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा दी जाए।
  2. सेवानिवृत्ति लाभ: Payment of Gratuity Act के तहत ग्रेच्युटी और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ दिए जाएं।
  3. संसाधन और आकस्मिक निधि: सरकारी कार्यों के लिए लैपटॉप/टैबलेट/मोबाइल और पंचायत स्तर पर Contingency Fund की व्यवस्था हो, और मनरेगा के नगद दिवस आधारित भुगतान को हटाकर राज्य अंश से भुगतान किया जाए।
  4. यात्रा भत्ता: जीविका के फील्ड स्टाफ की तरह रोजगार सेवकों को भी फील्ड भ्रमण के लिए सम्मानजनक यात्रा भत्ता (Field Allowance) दिया जाए।

संघ ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार समय रहते उनकी मांगों पर विचार नहीं करती है तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।


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By raj

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